Rehan Murder Case

20 august 2017
आज से 1 साल 3 महीने पहले मोहित के परिवार पे एक ऐसी विपदा आयी जिसमे उसको अंदाज़े से ज़्यादा तकलीफ देखनी पड़ी | मोहित का परिवार अपनी बाकि दिनचर्या में ही उलझा था की तभी शाम  को 6 बजे के करीब बाहर  लोगो का शोर सुनाई देता है और जानकारी पे पता चलता है कि बगल की गली में एक मर्डर हो गया है,यह बात सुनकर सब आसपास परेशान और भयभीत होकर अपने अपने परिवार को देखने लगे और सलामती कि दुआ कर रहे थे जो उनके साथ नहीं थे,उस शाम एक 10 वर्षीय बालक का क़त्ल बड़ी ही बेरहमी से किया गया था और पूरे शहर में अफरा तफरी मच गयी कि लाल कॉलोनी में मर्डर हुआ है,मोहित का परिवार भी घर से बाहर निकला और लोगो से जानकारी पे ऊपर कि बात पता चली,इसके बाद पुलिस,अधिकारी तमाम लोग आये और मौके का मुआयना किया और पाया कि ये क़त्ल  है, पर मकसद साधारण नहीं है,मौकाए वारदात से बच्चे को बाहर निकाला  गया और पाया गया कि बच्चे को कोई लेकर आया है क्यूकि उसके पैर साफ़ थे और चप्पल सधी हुई पड़ी थी,बहुत झाड़ियां होने पर वहां देखना मुश्किल था और ये भी साफ़ था कि इन झाड़ियों के पीछे जितने भी घर हैं वहां से भी कुछ नहीं दिख सकता,झाडिया काटी गयी और तब समझ आया कि पीछे कितनी गन्दगी है ,क्यूकि वहां कालोनी के हरेक के घर की गन्दगी आती थी तो वहां कोई जाता नहीं था बल्कि देखता भी नहीं था ,पर वहां एक टेलर भाईसाब थे जिनका काम ऊपर छत पर अकेले सिलाई से होता था ,उस शाम भी वो वही थे और घटना के दौरान कातिल वही से भागे थे जहा महज़ 2 मीटर की ऊंचाई पे टेलर साहब काम कर रहे थे ,भगदड़ की आवाज़ को तो उन्होंने स्वीकारा यहाँ तक की चीखने की आवाज़ को भी स्वीकारा पर पहचानने से इंकार कर दिया |
गुप्ता जी जिनके घर के पीछे मर्डर हुआ उनका बीटा उस दौरान बाहर से कुण्डी लगा के चला जाता है और जब गुप्ता जी की वाइफ से पूछताछ हुई तो बताया की हमारी तबियत खराब थी तो हम सो रहे थे (क्या टेलर से ज़्यादा दूर थे गुप्ता जी की वाइफ ,नहीं..और पूछने पर बताया कि आवाज़ आयी थी पर हमें दर था कि कही हमें भी न मार दे,आखिर माँ है ..बच्चे को तो सुरक्षित करना ही था..), खैर पुलिस में विवेचक बने हरिशंकर मिश्रा और उनको किदवई नगर थाने की कमान दी गयी थी |
क्युकी यह केस बड़ा था तो और भी थानों की पुलिस को साथ में काम करने को कहा गया था ऊपर से शहर काजी का दबाव की 48 घंटे में मामला खोला जाये |
पुलिस पर दबाव तो था ही इसी के चलते सीओ आतिश कुमार ने लिखित में 48 घंटे में मामला खोलने की बात कही,अगर एक सीओ यह बात कह रहा है तो बाकियो को तो इसको अपनाना ही पड़ेगा ,इसीलिए सबने अपने अपने ढंग से अब कातिल को ढूँढना चालू किया ,और इसी बीच एक सिंह जो की बाबूपुरवा में SO के तौर पर तैनात थे |
क्युकी सर्किल में वो भी थे तो उनको भी बुला के पूछा और मुखबिरों को एक्टिव कर दिया गया |
इसी दौरान AK Singh ने मोहित के परिवार को देखा और अपनी जानकारी और याददाश्त को खंगालते हुए डी एम ऑफिस में अपने खिलाफ पहुंची एप्लीकेशन को ध्यान में रखा जिसमे 50  हज़ार की डिमांड एक केस में फाइनल रिपोर्ट लगाने के लिए मांगे और मना  करने पर अपनी वर्दी का रौब दिखाके खूब डराया था और केस में फ़साने की धमकी दी थी |
मौका अच्छा था और निशाना भी अच्छा था ,अब प्लानिंग चालू हुई की काम होना कैसे है ,तो उसके लिए तैयार किये गए दो बच्चे जिनकी उम्र 10  साल की थी और फिर उनको उठा के पूरा दिन सी ओ ऑफिस में रखा गया और वह उनको तैयार किया गया ,जब बच्चो ने बताया कि मूछो वाले अंकल ने चॉकलेट दी और डांटा भी कि जैसा कह रहे वैसा कहो और ध्यान रखना यही कहना है तुम्हे हर जगह,इस पल तक मोहित को 26 aug 2016  को ले जाके 30 aug 2016 तक बिना बताये पुलिस ने हिरासत में ले लिया था और शुरुआत में दोनों भाई रोहित व मोहित को थाने में ले गए थे जहां 1 घंटे बाद में रोहित को छोड़ दिया था ,पर मोहित के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गयी थी ,पूछने पर बताया गया था कि मोहित से बात  करके छोड़ देंगे और इसी बात का सहारा लेकर उसको 26 अगस्त से लेकर 30 अगस्त तक बिना किसी कि जानकारी के रखा और उस पर 3 डिग्री का अत्याचार किया ,उसके लाख समझने और कहने के बावजूद कि उसका रेहान और उसके परिवार वाले से कोई वास्ता नहीं है ,पर उसकी एक न सुनी गयी और मारते मारते उसको कुबूल करने को कहते रहे और यही ए के सिंह आये और कहे मोहित से कि तू तो ठाकुर है क्यों नहीं कुबूल रहा पहले के ठाकुर अपने ऊपर ले लेते थे कोई भी बात ,तू नहीं कर सकता क्या ..उस मासूम को अंदाज़ा भी नहीं था कि ये ए के सिंह किस फ़िराक़ में है,अपने ऊँचे पदाधिकारियों से पहचान के कारन कोई डर नहीं था |
प्रशासन में होने के बाद आखिर किस बात कि चिंता थी,कानून केवल कमज़ोर के ही लिए बना था उस वक़्त यही लगा था,क्युकी यहां पर ऊपर से नीचे तक केवल एक ही बात चल रही थी कि मोहित के पेंट से खून मिला है..कितना ?  ये कोई नहीं बताएगा,एक बार जो रिपोर्ट ऊपर भेज दी गयी उसका देखने वाला कोई नहीं था ,और इसी का फायदा ए के सिंह ने उठाया और मोहित को हरिशंकर मिश्रा की निगाहो में आरोपी बना के जेल भेज दिया,
DM ,SDM ,अधिकारी सब जानते थे की ये गलत है पर किसी ने आवाज़ नहीं उठायी...
दोस्तों बात तो ये गलत तब समझ आयी जब पता चला कि मोहित के पापा एयर फ़ोर्स में है ,और अपने पुरे छेत्र में अपनी ईमानदारी को लेकर जाने जाते हैं और मोहित जहां 90 % स्कोर करता था ,और BCA की पढ़ाई कर रहा था ,उसको पुरे तरीके से फसा दिया गया था,
अब मोहित के पास कोर्ट के सिवा कुछ नहीं था जो उसकी मदद कर सके ,उसके परिवार ने और माँ बाप ने हर किसी से बात करी पर कोई रिस्पांस नहीं था ,इस दौरान प्रेस कांफ्रेंस से अपनी बात रखकर माँ बाप ने पूरी स्तिथि से मीडिया को रूबरू कराया पर प्रशासन पर कोई भी असर नहीं हुआ और फिर कोर्ट के ज़रिये लड़ाई चालू हुई ,इस दौरान पुलिस की तरफ से कई बार धमकी और जान से मारने की बात कही गयी ,पर बच्चे की बात थी और परिवार सही था तो एक उम्मीद के बदौलत सब चलते गए और इसके बाद की पूरी कहानी पेपर की इन कटिंग्स में देख सकते हैं..























आखिर में पूछना चाहता हूँ की आखिर कब तक इस तरीके से नौजवानो का भविष्य खराब किया जायेगा और इस तरीके से कानून से खिलवाड़ करने वालो के लिए आखिर कोई मज़बूत कानून क्यों नहीं आता ,आखिर कोर्ट के सामने झूठ लाया गया था और सरे साबुत गढ़े गए थे ,आलाकत्ल भी दारू की बोतल के ज़रिये गोताखोरों से बरामद करवाई गयी थी जिसको हरिशंकर मिश्रा ने खुद फेंका और यही बात गोताखोरों ने जज के सामने बताई थी,मामला साफ था और जज रजत सिंह जैन ने अपने फैसले में मोहित को बाइज़्ज़त बरी किया व पुलिस के खिलाफ आदेश करते हुए उनके खिलाफ dgp व एसएसपी को लिखित में भेजकर दोषी पुलिसकर्मियो को सजा देने की बात कही है,परन्तु हरिशंकर मिश्रा किसी तरीके से अपने को बचाने में लगे हैं वही अंधेरनगरी में एक और बात हुयी की ए के सिंह का प्रमोशन हुआ |
आप सभी भाइयो और बेहनो से गुज़ारिश है की हरेक के सामने ये बात अपनी ओर से ज़रूर रखिये और शेयर करे ताकि यह मामला हरेक की जानकारी में पहुंचे और वो इस बात से सही गलत का फैसला ले |

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